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डॉ प्रसन्नकुमार मोहंती, निदेशक, रा.आ.बैंक की संक्षिप्त प्रोफाइल

 
डॉ प्रसन्नकुमार मोहंती, निदेशक, रा.आ.बैंक की संक्षिप्त प्रोफाइल

Dr.PK Mohanty

डॉ प्रसन्नकुमार मोहंती, निदेशक, रा.आ.बैंक की संक्षिप्त प्रोफाइल डॉ प्रसन्न कुमार मोहंती हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पोस्ट-डॉक्टरल सदस्य थे। उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से एमए (अर्थशास्त्र), शहरी सार्वजनिक नीति एवं वित्त में विशेषज्ञता के साथ – बोस्टन यूनिवर्सिटी से एमए (राजनीतिक अर्थशास्त्र) तथा पीएचडी (अर्थशास्त्र) किया। वह पॉप्युलेशन काउन्सिल, न्यूयॉर्क के सदस्य भी थे, वर्तमान में वह हैदराबाद विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के चेयर प्रोफेसर हैं, तथा सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस (सीजीजी) एवं राष्ट्रीय शहरी प्रबंधन संस्थान (एनआईयूएम), हैदराबाद के सम्मानित सलाहकार हैं।

भारतीय प्रशासनिक सेवा (1979 बैच) केअधिकारी, डॉ. मोहंती आंध्र प्रदेश के संयुक्त राज्य सरकार के अंतिम मुख्य सचिव थे, यह पद उन्हें भारत सरकार के सचिव बनने के बाद दिया गया।उनके अन्य पदों में निम्न शामिल हैं: मिशन निदेशक, जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम), भारत सरकार; विशाखापत्तनम एवं हैदराबाद नगर निगम आयुक्त; उपाध्यक्ष, हैदराबाद शहरी विकास प्राधिकरण, महानिदेशक, सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस (सीजीजी), हैदराबाद, तथा जिला कलेक्टर और मजिस्ट्रेट, गुंटूर, आंध्र प्रदेश। वह राष्ट्रीय स्तर पर कई विशेषज्ञ समितियों के सदस्य रहे हैं, जिनमें राष्ट्रीय प्रशिक्षण नीति पर समिति, बीपीएल परिवारों की पहचान पर विशेषज्ञ समिति, विकेंद्रीकृत योजना पर विशेषज्ञ समूह, आदि शामिल हैं। विशाखापत्तनम एवं हैदराबाद नगर निगम में शहरी वानिकी के लिए उनकी पहल को दो बार प्रधानमंत्री पुरस्कार मिला।

डॉ. मोहंती ने दो महत्वपूर्ण पुस्तकों यथा “भारत मेंशहरों का वित्तपोषण: नगर –निगम सुधार, राजकोषीय जवाबदेही एवं शहरी अवसंरचना” –सेजप्रकाशन (2016)और “शहर एवं सार्वजनिक नीति: भारत के लिए एक शहरी एजेंडा” –सेजप्रकाशन (2014)के लेखक भी हैं। उन्होंने “भारत में शहरीकरण”: चुनौतियाँ, अवसर और भावी दृष्टिकोण”-सेजप्रकाशन (2014)कासह-संपादन किया।उन्होंने मौलिक अध्ययन: “भारतीय में नगरपालिका वित्त – एक आकलन”का नेतृत्व किया,जोकि भारतीय रिज़र्व बैंक (2007) द्वारा प्रकाशित किया गया। उनके वर्तमान अनुसंधान में राजकोषीय संघवाद, शहरी नियोजन तथा विकास, बुनियादी ढांचा वित्त, सुशासन एवं सार्वजनिक नीति सुधार शामिल हैं।